यादे

मेरी नजर आती हैं

माँ

मुझको तेरी बहुत याद आती हैं

वो तेरी ऊँगली पकड कर के चलना

समुन्दर की लहरों पर  गिरना मचलना

वे तेरा मुझको अपनी बाहों में भरना

माथे पर चुम्बन का टिका वो जड़ना

जब भी हवा अपने संग

समुन्द्र की खुसबू लाती हैं

माँ

मुझको तेरी बहुत याद आती हैं

वो मेरी चोट पर तेरा अंशु बहाना

मेरी बात सुन कर तेरा खिखिलाना

मेरी शरारतो पर झिड़की लगाना

फिर प्यारी सी लोरी गा कर सुनाना

जब भी रातो में हवा

कोई गीत गुनगुनाती हैं

माँ

मुझको तेरी बहुत याद आती है

2 Responses to “यादे”

  1. विनय प्रजापति Says:

    भइ क्या बात, दिल छू लिया!

  2. Ami Jha Says:

    Na jane kitne shabd jahan mein nahi aate hai maa ke liye
    bass feeling hai, jo kajaz par uthar nahi pate…

    bahut hi acha varnan kiya hai aapne

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